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महुँआ ले दारू नइ, अब बनही सेहत के लड्डू: कामू बैगा के नवां पहल ले बदलत हे आदिवासी समाज के सोच

बाबासाहेब के सपना पूरा करबो – नौकरी नइ मांगबो, रोजगार देबो"

बल्लूराम डॉट कॉम

विजय धृतलहरे

केसदा/कबीरधाम, 20 जून 2026।

कबीरधाम जिला के केसदा इलाका मं आदिवासी उद्यमी जगनी कामू बैगा ह महुँआ ला लेके एक नवां सोच अऊ नवां दिशा देय के काम सुरू करे हें। जिहां अब तक महुँआ के उपयोग जियादातर दारू बनाय बर होवत रहिस, उहीं अब महुँआ ले पौष्टिक अऊ स्वादिष्ट लड्डू बनाके समाज बर एक मिसाल कायम करे जात हे।

कामू बैगा के कहना हे कि महुँआ सिरिफ नशा के साधन नइ, बल्कि सेहत अऊ रोजगार के मजबूत आधार बन सकथे। एही सोच के संग महुँआ ले बने लड्डू के निर्माण सुरू करे गे हे। आने वाला बखत मं महुँआ ले 30-40 किसिम के खाद्य उत्पाद जइसने कुकीज, चिक्की, स्क्वैश अऊ दूसर पौष्टिक सामान बनाय के योजना बनाय गे हे, जेन ले गांव-गांव मं रोजगार के नवा अवसर बनही।

महुँआ उत्पाद के शुभारंभ मं कामू बैगा ह आदिवासी युवा मन ला संदेश देत कहिन कि अब नौकरी खोजे के बजाय खुद के व्यवसाय सुरू करे के समय आ गे हे।

ओमन कहिन, “व्यवसाय छोटे होवय या बड़े, सुरूआत करना जरूरी हे। बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के सपना रहिस कि हमन नौकरी मांगे वाला नइ, बल्कि दूसर मन ला रोजगार देय वाला बनन।”

महुँआ ला आदिवासी समाज मं कल्पवृक्ष के दर्जा मिले हे। एखर फूल मं विटामिन, आयरन, कैल्शियम अऊ प्राकृतिक मिठास भरपूर मात्रा मं पाय जाथे। अब तक एखर उपयोग मुख्य रूप ले पारंपरिक दारू बनाय मं होवत रहिस, फेर अब एला ‘सुपरफूड’ के रूप मं पहचान दिलाय के प्रयास सुरू होगे हे।

कामू बैगा के ए पहल ले सिरिफ आदिवासी समाज के आर्थिक स्थिति मजबूत नइ होही, बल्कि जंगल अऊ पारंपरिक ज्ञान ला देश-दुनिया मं नई पहचान घलो मिलही।

ओमन जिला भर के आदिवासी युवा मन अऊ महिला स्व-सहायता समूह मन ला आह्वान करिन कि महुँआ के ए अमृत स्वरूप ला अपनावंय अऊ आत्मनिर्भर भारत अऊ मजबूत आदिवासी समाज बनाय मं अपन योगदान देवंय।

संपर्क: जगनी कामू बैगा ग्राम केसदा, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़)मो. 7617275236

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