कवर्धाछत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, चिल्फी नेशनल हाईवे पर आदिवासी और वनभूमि पर फर्जी दस्तावेज से कब्जे का आरोप, 1929 के राजस्व रिकॉर्ड से मिलान की मांग।

छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, चिल्फी नेशनल हाईवे पर आदिवासी और वनभूमि पर फर्जी दस्तावेज से कब्जे का आरोप, 1929 के राजस्व रिकॉर्ड से मिलान की मांग।

कवर्धा। छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी ने कबीरधाम जिले में आदिवासी भूमि, वन भूमि, नेशनल हाईवे की भूमि, शासकीय भूमि, अर्द्धशासकीय भूमि, कोटवार भूमि, मंदिर-मठ की भूमि के फर्जी दस्तावेजों के जरिए पंजीयन का गंभीर आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। पार्टी ने 23 अक्टूबर को जारी पत्र क्रमांक 18/03 में नेशनल हाईवे चिल्फी में बिना अनुमति होटल निर्माण, अवैध शराब बिक्री और भूमि के कूटरचित दस्तावेजों की उच्चस्तरीय जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

 

पार्टी ने ज्ञापन में कहा है कि कबीरधाम जिला एक आदिवासी बाहुल्य और वनांचल जिला है, जहां सचिव, आयुक्त, जिलाधीश, एसडीएम, तहसीलदार, आरआई, पटवारी द्वारा भारत देश की भूमियों को कूटरचित दस्तावेज से बेचकर और पंजीयन कराकर उसे वैध किया जा रहा है। बाद में उसी भूमि पर भारत सरकार से ही मुआवजा लिया जा रहा है। पार्टी का आरोप है कि वनक्षेत्र को 1929 के राजस्व रिकॉर्ड से मिलान किए बिना हजारों हेक्टेयर भूमि को मैदानी क्षेत्र में परिवर्तित कर कब्जाधारियों के नाम पर पंजीयन किया जा रहा है और यह सारा कार्य जिला प्रशासन की मिलीभगत से हो रहा है।

 

*चिल्फी नेशनल हाईवे पर ग्रांड होटल बिगुल पर आरोप*

 

ज्ञापन के बिंदु क्रमांक 1 में छत्तीसगढ़ी समाज पार्टी ने आरोप लगाया है कि कबीरधाम जिले के चिल्फी नेशनल हाईवे पर ग्रांड होटल बिगुल पिछले 3 वर्षों से संचालित है, जहां कमरे किराए पर दिए जाते हैं। उससे लगा हुआ 20 रूम का एक और होटल हाईवे पर निर्माणाधीन है।

 

पार्टी का कहना है कि 10 वर्ष पूर्व यह पूरा क्षेत्र वन क्षेत्र था और आदिवासी क्षेत्र में किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति नहीं है। लेकिन भ्रष्टाचार के लेन-देन से फॉरेस्ट भूमि को साफ कर कब्जा दिलाया जा रहा है। ज्ञापन में लेन-देन का ब्यौरा देते हुए आरोप लगाया गया है कि प्रति एकड़ 25 लाख रुपये में कब्जा दिलाने, डीएफओ को 5 लाख, रेंजर को 5 लाख, तहसीलदार को 20 लाख और कलेक्टर नेशनल हाईवे के नाम पर 50 लाख रुपये खर्च कर कूटरचित दस्तावेज का निर्माण कर धंधा खोला जा रहा है।

 

*आदिवासी भूमि की बिक्री और सूचना के अधिकार में जानकारी की मांग*

 

बिंदु क्रमांक 2 में पार्टी ने कहा है कि आदिवासी भूमि कूटरचित दस्तावेज से पंजीकृत हो रही है, जबकि नियमानुसार आदिवासी भूमि का शासकीय रिकॉर्ड में बिना कलेक्टर अनुमति के विक्रय नहीं हो सकता। पार्टी ने मांग की है कि जिलाधीश कार्यालय में वर्ष 2001 से 2025 तक आदिवासी भूमि बिक्री के लिए कुल कितने अनुमति आवेदन लगे, इसकी वर्षवार जांच कराई जाए और इसकी सूची सूचना के अधिकार के तहत उपलब्ध कराई जाए।

 

साथ ही पार्टी ने मांग की है कि जिले की समस्त संदिग्ध भूमियों का 1929 के राजस्व रिकॉर्ड से मिलान कराया जाए, नेशनल हाईवे की भूमि पर बने होटलों की जांच संवैधानिक कार्यवाही के तहत की जाए और फर्जी दस्तावेज बनाने वालों पर एफआईआर दर्ज की जाए।

 

ज्ञापन की प्रति छत्तीसगढ़ी भवन, ग.प्यारेलाल सिंह मार्ग, हांडीपारा, रायपुर मुख्यालय से जारी की गई है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि जांच नहीं हुई तो वे राज्य स्तरीय आंदोलन करेंगे।

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