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भोरमदेव पदयात्रा म शामिल होय बर कलेक्टर के जनता ल नेवता

3 अगस्त के बुढा महादेव मंदिर कवर्धा ले भोरमदेव मंदिर तक निकलही पदयात्रा

बल्लूराम डॉट कॉम

विजय धृतलहरे

कवर्धा। भोरमदेव पदयात्रा ल लेके जिला प्रशासन फिर सक्रिय होगे हवय। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ह जिले के नागरिक मन ल अधिक ले अधिक संख्या मं पदयात्रा मं शामिल होय बर अपील करे हें। प्रशासन के उद्देश्य ए हवय कि भोरमदेव पदयात्रा श्रद्धा, संस्कृति अऊ जनसहभागिता के बड़ा आयोजन बने।

फेर ए अपील के बीच एक सवाल हर साल के जइसने ए साल घलो उठत हवय। कई बछर ले भोरमदेव पदयात्रा मं बड़ी भीड़ दिखे बर स्कूल के विद्यार्थी मन के बड़ी संख्या मं शामिल होय के बात सामने आवत रहिस। एखर ले आयोजन जरूर भव्य दिखथे, फेर आम जनता के स्वैच्छिक भागीदारी ऊपर सवाल घलो खड़ा होथे।

जिले के कई जागरूक नागरिक मन के कहना हवय कि यदि प्रशासन खुद जिलेवासी मन ल पदयात्रा मं शामिल होय बर अपील करत हवय, त आयोजन के सफलता के आधार घलो आम जनता के सहभागिता होना चाही। धार्मिक अऊ सांस्कृतिक आयोजन मं जनमानस के उपस्थिति बढ़े, ए सबसे जरूरी बात आय।

हालांकि, अब तक जिला प्रशासन के तरफ ले ए प्रकार के कोनो आदेश जारी नइ होय हवय कि स्कूल के विद्यार्थी मन ल अनिवार्य रूप ले पदयात्रा मं शामिल करे जाही। ए विषय मं अंतिम निर्णय प्रशासन अऊ शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र मं हवय। ए कारण ले अभी ले कोनो निष्कर्ष निकालना उचित नइ होही।

दूसर पक्ष मं कई लोगन के मानना हवय कि यदि स्कूल के विद्यार्थी अपन पालक के सहमति अऊ सुरक्षा व्यवस्था के साथ स्वेच्छा ले शामिल होथें, त एखर ले नई पीढ़ी ल भोरमदेव के इतिहास, संस्कृति अऊ परंपरा के जानकारी मिलथे। फेर जबरन या केवल भीड़ बढ़ाय बर विद्यार्थी मन ऊपर निर्भरता ल उचित नइ माने जावत।

संपादकीय टिप्पणी

अब सबके नजर जिला प्रशासन ऊपर हवय कि कलेक्टर के अपील के बाद जनभागीदारी बढ़ाय बर का नई पहल होही। यदि गांव-गांव अऊ शहर के नागरिक खुद आगे आके पदयात्रा मं शामिल होहीं, त भोरमदेव पदयात्रा सचमुच जनता के आस्था अऊ सहभागिता के मिसाल बन सकही।भोरमदेव पदयात्रा के गरिमा तबे अउ बढ़ही, जब ए आयोजन स्कूल के लइका मन के संख्या ले नइ, बल्कि जिले के आम जनता के स्वैच्छिक सहभागिता ले सफल होही। भोरमदेव प्रबंध कमेटी अऊ प्रशासन के जिम्किमेदारी हे व्यवस्था, सुरक्षा अऊ अनुशासन बनाए रखे, अऊ जनता के जिम्मेदारी हे कि अपन आस्था के सम्मान मं बढ़-चढ़ के हिस्सा लेवय।

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