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झीरम के सबूत रहिस त जांच एजेंसी ल काबर नइ दीन? राजनीतिक बयानबाजी ले सच नइ बदलय : सीएम साय

कांग्रेस के राजनीति के पुराना चरित्र ‘फूट डालव अउ राज करव’, जिहां जाथे उहां गुटबाजी करथें : मुख्यमंत्री साय

कांग्रेस के राजनीति के पुराना चरित्र ‘फूट डालव अउ राज करव’, जिहां जाथे उहां गुटबाजी करथें : मुख्यमंत्री साय

 

रायपुर, 6 सितंबर 2026। झीरम मामला मं एनआईए न्यायालय के हालिया फैसला के बाद कांग्रेस के बयानबाजी ऊपर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ह जमके पलटवार करे हें। मुख्यमंत्री ह कहिन कि ए मामला के जांच एनआईए ल ओ समय सौंपे गे रहिस, जब केंद्र मं कांग्रेस के अगुवाई वाली यूपीए सरकार रहिस।

करीब 13 बछर तक मामला के जांच अउ न्यायिक प्रक्रिया चलिस। 100 ले जियादा गवाह मन के बयान दर्ज होइस, अउ तमाम तथ्य-सबूत के जांच-पड़ताल के बाद न्यायालय ह फैसला सुनाइस। न्यायालय ह 10 झन ल दोषी ठहराइस अउ 16 सितंबर ल सजा के निर्धारण करे जाही।

 

एनआईए राज्य सरकार के एजेंसी नइ’

मुख्यमंत्री श्री साय ह कहिन कि कांग्रेस ल ये बात याद रखना चाही कि एनआईए राज्य सरकार के एजेंसी नइ, बल्कि देश के प्रमुख जांच एजेंसी आय। जब झीरम मामला एनआईए के पास गे रहिस, तब केंद्र मं कांग्रेस के सरकार रहिस।

उमन कहिन कि अगर कांग्रेस के नेता मन के पास मामला ले जुड़े कोनो तथ्य, प्रमाण या सबूत रहिस, त वोमन ल जांच एजेंसी के सामने रखना चाही रहिस। अब न्यायालय के फैसला आए के बाद राजनीतिक बयानबाजी करके सवाल खड़ा करना ठीक नइ हे।

 

भूपेश बघेल ऊपर सीएम साय के निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ऊपर निशाना साधत मुख्यमंत्री साय ह कहिन कि जब वो विपक्ष मं रहिन, तब कहत रहिन कि ‘सबूत जेब मं लेकर घूमत हवं।’

मुख्यमंत्री ह सवाल करत कहिन कि अगर उनके पास सच मं सबूत रहिस, त एनआईए ल काबर नइ सौंपिन? जांच एजेंसी के सामने तथ्य रखे बर उनके पास पर्याप्त समय रहिस।

उमन कहिन कि आरोप लगाना आसान होथे, फेर आरोप ल सही साबित करे बर तथ्य अउ सबूत जरूरी होथे। न्यायिक प्रक्रिया राजनीतिक बयानबाजी ले नइ, बल्कि तथ्य अउ प्रमाण के आधार मं चलथे।

 

कांग्रेस के ‘फूट डालव अउ राज करव’ के राजनीति : साय

कांग्रेस मं प्रभारी मन के फेरबदल ऊपर मुख्यमंत्री श्री साय ह तंज कसत कहिन कि कांग्रेस के राजनीति आज घलो अंग्रेज मन के ‘फूट डालव अउ राज करव’ के नीति ऊपर चलत हे।

उमन कहिन कि कांग्रेस जिहां जाथे, उहां गुटबाजी अउ आपसी खींचतान शुरू हो जाथे। जनता के मुद्दा ऊपर एकजुट होके काम करे के बजाय कांग्रेस के नेता मन अपन ही दल के भीतर एक-दूसर के खिलाफ राजनीतिक लड़ई मं लगे रहिथें।

 

पंजाब प्रभारी बनाए गे रहिन, उहां घलो विरोध के बात आइस : साय

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रभार बदले जाए ऊपर मुख्यमंत्री साय ह कहिन कि जब उनला पंजाब के प्रभारी बनाए गे रहिस, तब उहां घलो विरोध के बात सामने आइस। शायद एही के नतीजा आय कि अब उनके प्रभार के प्रदेश बदल दे गे हे।

मुख्यमंत्री ह कहिन कि ये कांग्रेस के अंदरूनी मामला आय, फेर अपन ही नेता मन के बीच लगातार विरोध अउ खींचतान सामने आना कांग्रेस के राजनीतिक कार्यसंस्कृति ल साफ दिखाथे।

 

‘पहिली अपन भीतर झांकय कांग्रेस’

मुख्यमंत्री श्री साय ह कहिन कि कांग्रेस ल दूसर मन ऊपर आरोप लगाए के पहिली अपन भीतर झांकना चाही। एक तरफ कांग्रेस के नेता मन न्यायिक फैसला ऊपर सवाल खड़ा करथें, अउ दूसर तरफ अपन ही संगठन मं एक-दूसर के खिलाफ मोर्चा खोलत रहिथें।

उमन कहिन कि छत्तीसगढ़ के जनता आरोप-प्रत्यारोप अउ भ्रम के राजनीति ल भली-भांति समझथे। जनता ल राजनीतिक बयानबाजी नइ, बल्कि तथ्य अउ प्रमाण चाही।

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