कवर्धाछत्तीसगढ़

आदिवासी महिला सरपंच बेकसूर होकर भी राजनीति की चढ़ी बली।

कवर्धा -: आदिवासी का हितैषी के नारा बुलंद इन दिनों छत्तीसगढ़ में देखने सुनने को मिलता ही है पर कवर्धा जनपद पंचायत के अन्तर्गत ग्राम पंचायत डबराभाट के आदिवासी महिला सरपंच श्रीमती भगवती बाई धुर्वे राजनीति की बली चढ़ा दी गई । सरपंच के ऊपर लगे आरोप को पढ़ने से लगता है ग्राम पंचायत डबराभाट में कुल 8 कार्य स्वीकृत है जीसमे एक काम आदर्श ग्राम योजना का है दूसरा कार्य एस बी एम योजना का है और तीसरा कार्य छ ग विकास प्राधिकरण का और पांच कार्य मनरेगा योजना से है जीसमे जांच अधिकारी ही बता रहे हैं सभी कार्य का वर्तमान परिस्थिति इससे साफ है सरपंच द्वारा सरकारी राशि की अनियमितता नहीं की गई है जो भी प्रथम राशि प्राप्त की है उसके निर्माण कार्य की है पर विभाग अपनी ग़लती छुपाते हुए सरपंच को दोषी करार दिया है।

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जबकी होना चाहिए था कार्य की मुल्यांकन करा कर दुसरी किस्ती सरपंच को देना चाहिए था तभी सरपंच कार्य को पुर्णता कराती पर विभाग एक किस्त जारी कर 100% सरपंच से कार्य लेना चाहती है जो पंचायत राज अधिनियम में नहीं है जबकी मनरेगा कार्य में कार्य एजेंसी को एक रुपया दिया ही नहीं है पर भी आदिवासी महिला सरपंच अपनी आर्थिक सामर्थता के आधार पर कार्य की है जैसे जांचकर्ता स्वयं प्रमाणित किया है ।इससे साफ है सरपंच आर्थिक अनियमितता नहीं की है पर भी धारा 40 के प्रयोग किया गया है।

वही आरोप है जाति प्रमाण पत्र के कालम रिक्त हैं तो सरपंच से आवेदक ज्यादातर फार्म स्वयं भर कर हस्ताक्षर कराते हैं कम पढ़ीलिखी महिला सरपंच हस्ताक्षर बस कर पाती है उसे फार्म भरना संभव नहीं है । और फार्म को सचिव या आवेदक खुद पुर्ण भर कर सरपंच से हस्ताक्षर कराना था पर ये नहीं किया गया पर भी सरपंच को एक तरफा दोषी करार दिया गया और धारा 40 के तहत बेकसूर आदिवासी महिला सरपंच की अधिकार अकबर जैसे दबंग मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में मंत्री के दामन को दागदार बनानें का एक सोची समझी रणनीति तो नहीं चल रही है।

,प्रशासन में मंत्री अकबर को स्वयं संज्ञान लेकर ग्राम पंचायत डबराभाट के आदिवासी महिला सरपंच श्रीमती भगवती बाई ध्रवे की संरक्षण करना चाहिए और भविष्य की षड्यंत्र को रोकने चाहिए वर्ना चुनाव में आदिवासी हितैषी का दम भरने वालों की दम जरुर निकाल सकते हैं ।

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