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CM बोले-‘शराबबंदी ही नहीं, पूर्व नशा बंदी हो, पर उसके लिए समाज में सुधार आवश्यक है..’ पूर्व IAS ने कहा-‘इस आत्मज्ञान की प्राप्ति CM को अब क्यों?’..शराबबंदी मामले में पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट

CM बोले-‘शराबबंदी ही नहीं, पूर्व नशा बंदी हो, पर उसके लिए समाज में सुधार आवश्यक है..’ पूर्व IAS ने कहा-‘इस आत्मज्ञान की प्राप्ति CM को अब क्यों?’..शराबबंदी मामले में पढ़ें विस्तृत रिपोर्ट

रायपुर, 17 जून 2023 :-छत्तीसगढ़ की राजनीति में शराबबंदी का विषय इन दिनों चुनाव से ठीक पहले सियासत का बड़ा विषय बना हुआ है। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बार-बार कहते रहे हैं कि सरकार की मंशा है कि शराबबंदी ही नहीं हो, बल्कि पूर्ण तरह से नशाबंदी होना चाहिए।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बयान देते हुए कहा है कि नशा मुक्ति अभियान चलाकर एक बदलाव का सकारात्मक वातावरण बनाने की कोशिश जारी है।

शराबबंदी के विषय पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बार-बार ‘एक ही बार में शराबबंदी संभव नहीं है,’ कहते हुए नजर आते हैं। वहीं अब इस मामले को लेकर रिटायर्ड आईएएस और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य गणेश शंकर मिश्रा राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते नज़र आए।

गणेश शंकर मिश्रा का कहना है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में जब 14वें नंबर के बिंदु पर कांग्रेस ने सरकार बनते ही पूर्ण शराबबंदी का वादा किया था, तो भला अब शराबबंदी संभव नहीं है, कहना सीधा-सीधा प्रदेश की 3 करोड़ से ज्यादा जनसंख्या वाली राज्य की जनता को बेवकूफ बनाने जैसा है।

पूर्व IAS गणेश शंकर मिश्रा ने बातचीत में कहा की यदि मुख्यमंत्री का कहना है कि शराबबंदी संभव नहीं है, तो भला इस आत्मज्ञान की प्राप्ति मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अब क्यों हो रही है? तब क्यों नहीं हुई जब जन घोषणापत्र में शराबबंदी पूरी तरह से करने की घोषणा करके जनता का वोट मांगा गया था। पूर्व आईएएस गणेश शंकर मिश्रा ने कहा मुख्यमंत्री भूपेश बघेल कभी घोर राजनीतिज्ञ की तरह व्यवहार करते हैं, तो कभी अपने आपको समाज सुधारक दिखाने लगते हैं। उन्होंने कहा कि अब शराब के सवाल पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अचानक समाज सुधारक की भाषा बोलने लगे हैं, जबकि शराबबंदी का वादा करके सत्ता पर आई कांग्रेस प्रदेश के लोगों से वादाखिलाफी कर रही है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस पार्टी ने शराबबंदी के नाम पर राज्य की जनता के साथ धोखा किया है। भाजपा नेता मिश्रा ने दावा किया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी बड़े बहुमत के साथ राज्य में सत्ता के साथ काबिज़ होगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पाटन रवाना होने से पहले कहा कि भाजपा सोशल मीडिया पर झूठ फैलाती है। कांग्रेस सच के साथ सोशल मीडिया पर काम करेगी। उन्होंने भाजपा विधायक अजय चंद्राकर पर तंज कसते हुए है कहा कि उन्हें चुनाव के लिए कोई जिम्मेदारी दी गई है क्या? छत्तीसगढ़ में तो ओम माथुर ही भाजपा के लिए सबकुछ हो गए हैं। माथुर जी हर जगह दिखते हैं, मीडिया, ट्विटर में। उन्होंने दावा किया कि भाजपा 2018 में हार गई थी, इस चुनाव में भी हारेगी।

शराब से कितना राजस्व?

गौरतलब है कि बजट सत्र के दौरान राज्य के आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने दावा किया था कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इस वित्तीय वर्ष शराब में लक्ष्य से अधिक राजस्व प्राप्त किया है। विधानसभा के बजट सत्र में राज्य के आबकारी मंत्री कवासी लखमा ने बताया था कि छत्तीसगढ़ में इस वित्तीय वर्ष में शराब से निर्धारित लक्ष्य से 100.47 प्रतिशत कमाई हो चुकी है। मंत्री लखमा ने यह जानकारी दी थी कि एक अप्रैल 2022 से छह फरवरी 2023 तक 5499 करोड़ रुपये का लक्ष्य था, जिसके विरूद्ध अब तक 5525 करोड़ रुपये मिल चुके हैं। इसके साथ ही इन दिनों शराब मामले में कई नेताओं के यहां प्रवर्तन निदेशालय ने छापेमारी भी की थी, जिसमें राजनीति महीनों से गर्म है।

BJP शराबबंदी पर सम्मेलन में जुटी रिकार्ड तोड महिलाएं

धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मांढर में 27 मई को राज्य सरकार की शराबबंदी पर वादाखिलाफी के विरोध में भाजपा द्वारा सभा का आयोजन किया गया था। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाओं ने इकठ्ठा होकर शराबबंदी पर वादाखिलाफी के विरोध में निंदा प्रस्ताव पारित किया था। साथ ही इस सम्मेलन में भारी संख्या में महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ कराकर इस आयोजन का पूर्ण भी समर्थन किया। इस सम्मेलन में भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह, संगठन महामंत्री पवन साय, भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष शालिनी राजपूत के साथ ही भाजपा के विभिन्न मोर्चा संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित हुए थे। इस सम्मेलन में भाजपा ने कार्यक्रम संयोजक के तौर पर राज्य के पूर्व आईएएस और भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य गणेश शंकर मिश्रा को ज़िम्मेदारी दी थी। साथ ही सम्मेलन की सफ़लता से खुश राज्य भाजपा नेताओं ने भविष्य में शराबबंदी का संकेत भी दिया था।

208 ग्राम पंचायतों में बनी थी भारत माता वाहिनी

गौरतलब है कि अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान आबकारी आयुक्त रहे गणेश शंकर मिश्रा ने 208 ग्राम पंचायतों में भारत माता वाहिनी का गठन किया था। इसे शराबबंदी की दिशा में आंशिक मद्यनिषेध का एक बड़ा स्टेप माना जाता था।

पुर्व आईएस गणेश शंकर मिश्रा कहना है कि मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि क्या शराबबंदी का वादा करके सत्ता में आई पार्टी भारत माता वाहिनी, जो समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत आती है, उसे बढ़ाने का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने काम किया? उन्होंने कहा कि साढ़े चार वर्ष बीतने के बाद अब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समाज कल्याण विभाग को नया निर्देश जारी करके जनता को गुमराह करने में लगे हुए हैं।

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