कवर्धाछत्तीसगढ़

नवीन पाठ्य-पुस्तक आधारित एफएलएन प्रशिक्षण का द्वितीय चरण संपन्न

नवीन पाठ्य-पुस्तक आधारित एफएलएन प्रशिक्षण का द्वितीय चरण संपन्न

पंडरिया – एससीईआरटी के निर्देशन में कक्षा पहली से तीसरी तक अध्यापन कार्य करने वाले प्राथमिक शिक्षकों हेतु पाँच दिवसीय नवीन पाठ्य-पुस्तक आधारित एफएलएन (बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता) प्रशिक्षण कार्यशाला के द्वितीय चरण का आयोजन दिनांक 10 जनवरी 2026 से 15 जनवरी 2026 तक किया गया।

इस प्रशिक्षण कार्यशाला में 12 संकुलों के कुल 125 प्राथमिक शिक्षक सहभागी बने। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक दक्षता को सुदृढ़ करना तथा नवीन पाठ्य-पुस्तकों के अनुरूप शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना रहा। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को भाषा, गणित, पर्यावरण, अंग्रेजी, कला एवं योग शिक्षा से संबंधित नवीन पाठ्य-शिक्षण सामग्री, गतिविधि आधारित शिक्षण, खेल-खेल में सीखना, स्तरानुसार शिक्षण, नई शिक्षा नीति के अंतर्गत शिक्षण की चार-खंडीय रूपरेखा, थीम आधारित शिक्षण, 21वीं सदी के कौशल, सीखने-सिखाने की प्रक्रिया में कर्तव्यों का क्रमिक हस्तांतरण, पाठ्य-पुस्तक, अभ्यास पुस्तिका एवं शिक्षक संदर्शिका का समन्वय, डिजिटल शिक्षा के उपयोग तथा मूल्यांकन की आधुनिक विधियों की जानकारी दी गई। यह प्रशिक्षण कार्यशाला डाइट प्राचार्य टी. आर. साहू, एफएलएन प्रभारी रामकुमार पाण्डेय, विकासखंड शिक्षा अधिकारी एम. के. गुप्ता, बीआरसी राममुरारी यादव एवं जोन प्रभारी सभाजीत सिंह के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। प्रशिक्षण अवधि के दौरान बीआरसी राममुरारी यादव, एससीईआरटी एफएलएन कोर ग्रुप से सुमित पाण्डेय एवं आरती ठाकुर द्वारा आकस्मिक निरीक्षण कर सत्रों की मॉनिटरिंग भी की गई।

सत्रों में विशेषज्ञ प्रशिक्षकों देवलाल साहू, लक्ष्मण बांधेकर, शिवकुमार बंजारे एवं विक्रम जांगड़े द्वारा कक्षा-कक्ष में व्यवहारिक प्रयोग, गतिविधि आधारित शिक्षण, मेला विधि, शिक्षण सहायक सामग्री, पंचकोश, पंचादि प्रणाली, जादुई पिटारा के उपयोग तथा बच्चों की सीखने संबंधी कठिनाइयों की पहचान कर उनके समाधान पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों ने समूह कार्य, प्रस्तुतीकरण एवं अनुभव साझा कर सत्रों को और अधिक जीवंत व उपयोगी बनाया। समापन अवसर पर प्रतिभागी शिक्षकों ने प्रशिक्षण को अत्यंत लाभदायक बताते हुए प्राप्त ज्ञान एवं कौशल को विद्यालय स्तर पर प्रभावी रूप से लागू करने का संकल्प लिया, जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सके।

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